बिश्व के आध्यात्मिक जगत के इतिहास को निर्मित करने में अनेकों ऋषि-महर्षि , संत महात्माओं एवं महापुरुषों का योगदान रहा है |  अनादी काल से आध्यात्मिक एवं धार्मिक एकता की पवित्र भूमि भारत बर्ष के महापुरुषों , ऋषि मुनियों ने समय समय पर भारत की इस आध्यत्मिक धरोहर को जीवित बनाये रखा है | वैसे ही देवभूमि उत्तराखंड के लालकुआँ में स्थित श्री हंस प्रेमयोग आश्रम बिन्दुखत्ता एक आलौकिक एवं आध्यात्मिक स्थान है | जो की साक्षात् बैकुंठ धाम है |बिन्दुखत्ता आश्रम को यदि -" परमानन्द आश्रम " श्री हंस योग धाम बिन्दुखत्ता कहा जाये तो अधिक उपुक्त जान पड़ता है | इस आश्रम का एक अलग महत्व है . श्री हंस जी महराज के मिशन के परमानन्द जी कुमाऊ में प्रथम महात्मा प्रचारक है . इनके बाद परमानन्द जी के सहयोगी के रूप में या अलग स्वतंत्र रूप में अनेकों प्रचारक महात्मा तथा बाई आये है .


 

अर्द्शाताव्दी रजत जयंती महाशिवरात्रि महोत्सव १९६० हंस प्रेम योग आश्रम बैकुंठ धाम स्वामी परमानन्द जी द्वारा परम कुटी की स्थापना की गयी |जिसको उन्होंने अपनी साधनास्थ्ली के रूप में किया |प्रारंभ महाशिवरात्रि पर्व पर सामाजिक वातावरण से व्यक्त होकर उन्होंने साधना आरम्भ की उस समय कुटी के चारो तरफ शेर , हाथी , चीते , हिरण ,भ्रमण करते थे | जिनके कोलाहल से  उनकी  साधना में अधिक परिपक्वता आई |और वहां किसी को भी बहुत लम्बे समय मिलने तक की इजाजत नहीं थी | जनवरी १९६० में पुराने खत्ते में कई प्रेमी भक्त थे |  आधा किलोमीटर लम्बी भयानक झाडियों में लेटकर इस स्थान पर पहुंचे |


 

चiरों तरफ देखने के पश्चात उनको यह स्थान अपने साधना के लिए उपयुक्त लगा तत्पच्यात प्रतिबर्ष यहाँ पर महाशिवरात्रि पर्व मनाया जाने लगा | इमरजेंसी के टाइम पर जंगलाद विभाग ने उनकी कुतिया ध्वस्त कर दी | तब श्री शेर सिंह जी कुछ प्रेमी भक्तों को लेकर डे.फ़ो.ओ. श्याम लाल वर्मा जी के पास पहुचे | उन्होंने कहा की ये भूल में तोड़ी गयी है आप लोग फिर से बनवा ले | उस समाये महात्मा जी भ्रमण पर गए हुए  थे , यह कार्यवाही उनकी गैर उपस्तिथि में हुई | तत्पश्चात कुछ अराजक तत्वों ने मिलकर साजिस रची |


 

उनका साथ देने में पूर्व लाल कुआँ डेरी के अध्यक्ष नरोत्तम बमेटा , डे.फ़ो.ओ. उर्वादत्त कुछ क्षेत्रीय नेता आड़ीशनल चीफ डा.पी. जोशी जी को उकसाने पूरे दलबल के साथ गए और कुटिया को ध्वस्त किया गया | ये सब लोग कहने लगे ये ढ़ोग है पाखण्ड है हम देखेंगे की यह आश्रम कैसे बनता है |
आड़ीशनल चीफ डा.पी. जोशी जी का नोटिस आया , यहाँ पर एक मूर्ति भी रखने की भी इजाजत नहीं मिल सकती है | जो नोटिस श्री शेर सिंह कतरी जी के पास मौजूद है | जब उन्होंने भगवान और शक्ति को चैलेंज किया तब श्री महात्मा जी ने आवेग में आकर ये घोषणा की कि बिन्दुखत्ता का एक एक इंच जमीं आवाद होकर रहेगी , क्योंकि उन लोगो ने किसी व्यक्ति को नहीं बल्कि भगवान , शक्ति और सिद्धांत को चैलेंज किया ये सबको विदित है कि इश्वरीये को चैलेंज करने वाला इस स्रष्टि पर टिक नहीं पाया यह इश्वर का अटल नियम है |


Picture